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Monday, August 18, 2014

तू गुज़री है बहुत पास से मेरे
तुझे खोने से जी डरता है

यूँ तो सुनाती है दास्ताँ-ए-ज़िन्दगी तू
तेरी आँखों की ख़ामोशी से जी डरता है

आ गयी इस शाम की सुबह भी चलते चलते
अब तेरे रूबरू न होने से जी डरता है

Tuesday, July 1, 2014

धड़कने दे मुझे
तेरी आदत से पहले
कहीं होना तेरा
लाज़िम न हो जाये
ऐसे तो नाकारा था ही मैं
तेरे जाने से कहीं
मेरा अक्स भी पराया न हो जाये 

Friday, June 20, 2014

The dark side of the moon

In your silent mystique

And strange mysteries

I saw a fanatic dream

Resembling, a morning beam

Reflections mounting night and day

Like strong breeze by the bay

Pushing you towards the edge by noon

Into the dark side of the moon

Thursday, May 8, 2014

D23

उथल पुथल सी हो रही हैं धड़कने
अंगारे उगल रही हैं करवटें
अब तेरी नज़रों की छाव में ही
नींद की वो पलक झपकेगी  

Monday, April 7, 2014

Phir Ye Sanjh

आज फिर ये साँझ
एक चादर ओढ़ आयी

जिसकी हलकी छाव में
छुप गए हम तुम

आसमा देखो
ललचा रहा जैसे

वक़्त देखो
इतरा रहा जैसे

चुपके से
हो गयी रात

जिसका बहाना लिए
चले गए तुम

और छोड़ गए हमें
तनहा अकेले

उस चाँद की
रौशनी में

जो खुद तुमसे
शीतलता चुराता है

Friday, April 4, 2014

Khamoshi

उनकी ख़ामोशी

एक सैलाब सी

हम जान

मुसाकत कर बैठे

टटोल कर जेब

कुछ पुरानी यादों को

आज़ादी की

रकम बना बैठे

Tuesday, March 25, 2014

याद

गहरे पानी में
आग बन
रह गयी
वो याद,
जब
लाख की कोशिश
भुलाने की -
एक बूँद
प्यास बन
रह गयी
वो याद  

Tuesday, March 11, 2014

Arzoo

आरज़ू थी, जिस मुकाम की
जुस्तजू बन रह गयी,
कोशिश थी लाख
उन्हें भुलाने की,
वो कोशिश ही -
तक़दीर बन रह गयी। 

*जुस्तजू = Quest 

Tuesday, February 25, 2014

फिर

एक जज्बात

अधूरा सा,

छू ना सकना

तेरे होठों को,

तरसते रहना

हल्के हल्के,

निगाहों से

पीते रहना,

उन आँखों से 

टपकती 

अदृश्य स्याही,

जो दिल के 

कोरे पन्नो पर,

छोड़ गयी 

पहेली,

जिसे 

बुझाने की 

चाह में,

बेचेन रहना,

और 

खुद में ही 

डूब जाना 

Friday, January 3, 2014

F

My voice shall not touch you for long
Wonder not, my friend
For it will shatter with time
But what will remain
Is a Daisy
With heart full of wishes
That I have secretly plucked
From your lovely smile

Wednesday, December 18, 2013

Kafir

मद-मस्त था जो अपनी धुन में
उसे मायूस बना दिया
एक आलिम को तेरे इश्क़ ने
काफ़िर बना दिया

*आलिम =  An educated Muslim Scholar
*काफ़िर =  Disbeliever

Monday, December 16, 2013

Sanjh


अपनी ही धुन में

ढलते ढलते

एक हसीन सांझ ने

धूप के रंगों से

चुन कर तेरे काले घने केसू

मेरे दिल की सूनी दीवार को

रंग दिया

Monday, December 9, 2013

Khamoshi

किससे हज़ार पुराने वो
महफ़िलों में बयान करते हैं
दास्तान-ए-इश्क़ की टूटी कहानी
बाज़ारों में सुनाया करते हैं
गम का काफिला बड़ी आसानी से मिलता है उन्हे
वरना इस दर्द-ए-इज़हार को लोग
खामोशी से अपनाया करते हैं

*काफिला = Caravan

Friday, August 30, 2013

Woh Raat

वो रात
भी क्या रात थी
जब धुंडने निकले
आँखे मूँद कर
चुपकर
जिसका ठिकाना न था
बस एक ख्याल था
ज़ेहन में
कोई पैमाना न था
यूँ तोह
नाज़ुक सा बोझ था
सच पूछो
कच्चा हमका होश था
धड़कने जवाब देने लगीं
एक हलचल सी होने लगी
हिमात करके भी
चुप रह न सके
कहना था जो
कह ही गए
लेकिन वो रात
अधुरा एहसास थी
जैसे, सामने आ जाये वो
जिसकी तलाश थी
और कह न सके
दिल में दबी जो बात थी  

Monday, May 13, 2013

Last Romance

A water droplet drizzled from her face

Like snow gently melting down the hills

Her hair casually drenched, touching her lips

As if nature purposely spelled its magic across the valley

Her enchanted eyes, enticing me for a touch

Like the dry Sahara calling the rain clouds

Her laugh playful like a child

Unspoiled by practicality of life

The sound of her breath

Seducing the silence to break

Inspiring me her subtle charm

Her opaque beauty betraying my senses

As I'm unable to differentiate real from imaginary

Intoxicated by her last romance

I will be enliven for the days to come

Monday, April 29, 2013

Confession

एक झूट में अकसर कहता रहूँगा

दर्द-इ-एहसास को सहता रहूँगा

सच की तलाश करते कभी

फुरसत से आईने में झांकना

तेरी आँखों की परछाई में

तुझे ही धुड़ता मिलूँगा

Monday, April 8, 2013

An evening to remember

In the midst of this rushing life

Time stops one evening

With wreath of flowers on every street

And the radiant glow of the sky

Waiting to be shadowed by a silent evening

Blurring the mighty sun as time goes by

You touch my thoughts with your tiny hands

As I speak my heart

Baffling me with your intoxicating eyes

Your voice so calm and serene

Inviting me to your world

Tiny yet wonderful and real

I see what you saw

I feel what you felt

And as I wait to regain my lost senses

I know

That it's a beginning of something beautiful

Tuesday, January 15, 2013

Mohabbat na kar jaana

कर ,
चाहे जो कर जाना,
पर भूल कर भी,
मोहब्बत न कर जाना,

कह,
चाहे जो कह जाना,
मोहब्बत हो भी जाए,
तो इज़हार न कर जाना

बढती कहानी हो,
इशारों में थम जाना,
इज़हार वो कर भी दे,
तू इक़रार न कर जाना

हार,
चाहे जो हार जाना
गर, भूल से भी
दिल न हार जाना

ये दिल बड़ा ही कमजोर है,
मोहब्बत भुला न पायेगा,
रंगीन यादों पर भी,
ये आंसू बहायेगा

फिर भी, मोहब्बत तेरी ज़िद है,
तोह इसे आँखों से कर ले
ये रूठ कर भी खामोश रह जाएँगी
दिल के टूटने पर
तेरे आंसुओं का,
कडवा ज़हर भी पी जाएँगी

Tuesday, December 25, 2012

Aahat

आहट न होती उन आँखों से,
तो डूबा ही रहता, अनजान ख्यालों के समंदर में . . .
उलझा तो वैसे आज भी हूँ,
बस, एक छोटी सी मुलाक़ात में,
उनकी आंखो से लफ्ज़ झलके,
और मेरे ख्यालों को एक पहचान मिल गयी . . .

Sunday, April 15, 2012

Raaz

क्या राज़ है तेरे चेहरे का
अंजान होकर भी अंजाना ना लगे
कश्ती को किनारा मिला हो जैसे
मुसाफिरों का ठिकाना सा लगे

आँखों में मासूमियत, सादगी हो जैसे
एक खाव्ब पहचाना सा लगे
राज़ हज़ारों छुपे हो जिनमे
हर राज़ एक आईना सा लगे

होटो पर कशिश, एक चाह हो जैसे
तपती धूप में, बारिश की बूँद हो जैसे
जिनके स्पर्श से कोयला भी चाँद सा लगे
कर दे अमर जिसे छू ले तू
असर ऐसा, कोई जादू टोना सा लगे

रोक लिया खुदको ये सोचकर
दूर ना चले जाओ तुम
कहीं ये इज़हार दीवानापन सा ना लगे
एक गीली तस्वीर जो तुम
जिसकी एक झलक भर में
हर रंग सतरंगी सा लगे

राज़ जैसे राज़ ना हो कोई
तेरा चेहरा मुझे
बस एक सुलझा हुआ जवाब सा लगे