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Friday, January 15, 2021


कई किनारे छोड़ दिए
तुझे पाने की चाह में
ए जिन्दगी,
मैंने सैलाबों पर चलना सीख लिया,
गर तू ना मिली आखिर
तेरी खोज को मुकाम समझ लेंगे।

Wild Rose


सर्द की परछाई में
सैकड़ों पेड़ कांटे हो जाएंगे
नदियां बर्फ और रास्ते बंद हो जाएंगे
फ़िर किसी सुबह
वादियों का एक गुलाब
इन्हीं कांटों में अपनी रूह पकड़
खिल उठेगा
और इस सियाह ओ सफेद को
अपना रंग देकर आरुश कर देगा

Saturday, May 18, 2019

अकेला था

चांदनी थी, रौशनी थी,
इस क्रोधित जड़ैया में लेकिन, मखमली घाम न था

स्वाद था, ज़ायका था
इस परोसी थाली में लेकिन, एक चुटकी खारा न था

साँसें चल रहीं थी बरसों से,
इस भीनी खुसबू का लेकिन, कोई इशारा न था

आँखों के परदे तो थे कई,
यूँ पलके छुपाने का लेकिन, कोई इरादा न था

आवाज़ थी, पुकार थी
यूँ बैठ जाये भीतर लेकिन, कोई अनुवाद न था

अकेला था, कोई दूसरा न था
इतना तनहा होगा मिलना लेकिन, ये एहसास न था

तलाश थी, जुस्तजू थी
अंत ही माटी हो लेकिन, ये बर्दाश्त न था 

Tuesday, November 18, 2014

Silence

My silence, Her anger
Her silence, My agony

Friday, October 10, 2014

Papa


कुछ पंख मुरझा जाते हैं

कुछ नाज़ुक हो जाते हैं

वक़्त का सितम

इतना आसान नहीं होता

धन की बुनियाद पर बनते हैं रिश्ते

पर साथ देता हैं मेरा

आज भी वो दोस्त

जैसे पुराना कोई क़र्ज़ चुका रहा हो

जो बिना अपनी जेब टटोले

सीना थामे

उड़ने देता हैं

आशा की एक किरण

और मेरे कई हज़ार सपने

और छू लेता हैं

दिल का हर एक हिस्सा

जो खिलखिला उठता हूँ

में ये सोच कर

की फ़िक्र न कर

एक फरिश्ता है तेरा हाँथ थामे

Sunday, October 5, 2014

Wednesday, August 20, 2014

Lafz

कुछ कहना ही है मेरे यार

तो बोल वो लफ्ज़

जो मेरी मांगी हुई दुआ बन जाएँ

चुप रहना ही है मेरे यार

तो ले चल वहां

जहाँ मेरी दुआ कुबूल हो जाये

Monday, August 18, 2014

तू गुज़री है बहुत पास से मेरे
तुझे खोने से जी डरता है

यूँ तो सुनाती है दास्ताँ-ए-ज़िन्दगी तू
तेरी आँखों की ख़ामोशी से जी डरता है

आ गयी इस शाम की सुबह भी चलते चलते
अब तेरे रूबरू न होने से जी डरता है

Wednesday, July 2, 2014

Desert Walk



Sometimes
The world dances with you
Praises you
Loves you
But sometimes
You walk all alone
On a dark long path
Full of thornes
No one to hold your hand
And say - it's gonna be alright son
And you question yourself
What wrong have I done?
Your body aches
And there is only fear
No shoulder to cry on
No love, no care
Your sorrows
They multiply
But the road
It doesn't simplify
Should I give up?
And just go home?
I am no hero in my life
I am all alone!
But I can't give up
Not so soon
My dark nights
Sure have a moon
I walk
And I walk
My mind
Ceases to stop
May be my destiny is far
And peace a forgotten affair
But I won't give up
Not unless I am there

Tuesday, July 1, 2014

धड़कने दे मुझे
तेरी आदत से पहले
कहीं होना तेरा
लाज़िम न हो जाये
ऐसे तो नाकारा था ही मैं
तेरे जाने से कहीं
मेरा अक्स भी पराया न हो जाये 

Friday, June 20, 2014

The dark side of the moon

In your silent mystique

And strange mysteries

I saw a fanatic dream

Resembling, a morning beam

Reflections mounting night and day

Like strong breeze by the bay

Pushing you towards the edge by noon

Into the dark side of the moon

Thursday, May 8, 2014

D23

उथल पुथल सी हो रही हैं धड़कने
अंगारे उगल रही हैं करवटें
अब तेरी नज़रों की छाव में ही
नींद की वो पलक झपकेगी  

Monday, April 21, 2014

Hope

टिक टिक कर 
निगलती जा रही ज़िन्गदी मुझे 
जैसे प्यासी घूंट  
निगलता है मुसाफिर कोई 
इल्तेजा है इतनी 
रात के उन अँधेरे सन्नाटों में 
एक-आधा चाँद मेरा भी झलक जाये 

Monday, April 7, 2014

Phir Ye Sanjh

आज फिर ये साँझ
एक चादर ओढ़ आयी

जिसकी हलकी छाव में
छुप गए हम तुम

आसमा देखो
ललचा रहा जैसे

वक़्त देखो
इतरा रहा जैसे

चुपके से
हो गयी रात

जिसका बहाना लिए
चले गए तुम

और छोड़ गए हमें
तनहा अकेले

उस चाँद की
रौशनी में

जो खुद तुमसे
शीतलता चुराता है

Friday, April 4, 2014

Khamoshi

उनकी ख़ामोशी

एक सैलाब सी

हम जान

मुसाकत कर बैठे

टटोल कर जेब

कुछ पुरानी यादों को

आज़ादी की

रकम बना बैठे

Sunday, March 30, 2014

Arziyan

खवाजा गरीब नवाज़ 
अर्ज़ियाँ थोड़ी सी 
मन्नतें अधूरी सी 
फरियादें हलकी सी 
रंग दे मेरे यार की भी 
तेरे हरे रंग से 

Tuesday, March 25, 2014

याद

गहरे पानी में
आग बन
रह गयी
वो याद,
जब
लाख की कोशिश
भुलाने की -
एक बूँद
प्यास बन
रह गयी
वो याद  

Thursday, March 13, 2014

Yeh Zindagi

तिनके सी
ज़िन्दगी सही
एक सहर नयी
एक साँझ नयी
एक बात नयी
मुलाक़ात नयी
एक सोच नयी
पहचान नयी
हर पल बदलती
ये कहानी नयी
कभी छू हो जाती
तितली की तरहा
कभी फुरसत से
करती बातें
कभी कैद करती
मुझेमें ही मुझको 
तो कभी रूबरू कराती
अक्स बन मेरा
कर्म ये
अंजाम ये
एक अजनबी सा
इम्तिहान ये  
ये ज़िन्दगी 
चली मनचली 

Tuesday, March 11, 2014

Arzoo

आरज़ू थी, जिस मुकाम की
जुस्तजू बन रह गयी,
कोशिश थी लाख
उन्हें भुलाने की,
वो कोशिश ही -
तक़दीर बन रह गयी। 

*जुस्तजू = Quest 

Sunday, March 2, 2014

कहते रहे वो अक्सर 
ये दुनिया जायज़ नहीं 
और हम, सोचते रहे 
ख़ामोशी से 
तेरे मिलने से मुनासिब 
और क्या होगा।