तुझे पाने की चाह में ए जिन्दगी, मैंने सैलाबों पर चलना सीख लिया, गर तू ना मिली आखिर तेरी खोज को मुकाम समझ लेंगे।
Wild Rose
सर्द की परछाई में सैकड़ों पेड़ कांटे हो जाएंगे नदियां बर्फ और रास्ते बंद हो जाएंगे फ़िर किसी सुबह वादियों का एक गुलाब इन्हीं कांटों में अपनी रूह पकड़ खिल उठेगा और इस सियाह ओ सफेद को अपना रंग देकर आरुश कर देगा
तिनके सी
ज़िन्दगी सही
एक सहर नयी
एक साँझ नयी
एक बात नयी
मुलाक़ात नयी
एक सोच नयी
पहचान नयी
हर पल बदलती
ये कहानी नयी
कभी छू हो जाती
तितली की तरहा
कभी फुरसत से
करती बातें
कभी कैद करती
मुझेमें ही मुझको
तो कभी रूबरू कराती
अक्स बन मेरा
कर्म ये
अंजाम ये
एक अजनबी सा
इम्तिहान ये
ये ज़िन्दगी
चली मनचली